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आर्य वीर नेत्र चिकित्सालय
(पंजीकृत चैरिटेबल ट्रस्ट)
 
 
 
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आर्य वीर धर्मार्थ औषधालय

गुड़गाँव आज एक महत्त्वपूर्ण अन्तर्राष्ट्रीय नगर है। परन्तु 40 वर्ष पूर्व यह एक छोटा नगर था । सभी क्षेत्रों में यह पिछड़ा था । उद्योग-व्यापार कम था । चिकित्सा की सुविधाएँ नहीं थीं । नेत्र रोगों का यहां कोई डाक्टर नहीं था । ऐसे समय में आर्यवीर दल गुड़गाँव के समर्पित कार्यकत्र्ताओं ने 15 मार्च 1970 को आर्य समाज मन्दिर अर्जुन नगर गुड़गाँव में डा0 त्रिलोक नाथ आहूजा जी के सहयोग से आर्य वीर नेत्र चिकित्सालय की स्थापना की। कार्यकत्र्ताओं की लग्न तथा सेवा भाव से दूर-दूर से नेत्र रोगी आकर इलाज करवाने लगे ।

वर्ष 1980 के आस-पास आदरणीय डा0 ज्योति प्रकाश आर्य जी आयुर्वेदाचार्य जो कि हिमाचल प्रदेश में ब्डव् पद पर नियुक्त थे आर्य समाज अर्जुन नगर के साप्ताहिक सत्संग में पधारे । उन्होंने अपने उपदेश में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति की भरपूर प्रशंसा की । रोगों के स्थायी निवारण के लिये वैदिक चिकित्सा पद्धति का महत्त्व बताया । आदरणीय डाक्टर साहब जब भी गुड़गाँव पधारते, आर्य समाज मन्दिर मंे आकर यहाँ चल रही गतिविधियों का भी निरीक्षण करते । नेत्र रोगियों की चल रही सेवा से वे अत्यन्त प्रभावित थे। वे सदैव प्रेरणा करते कि आयुर्वैदिक चिकित्सा पद्धति का भी एक केन्द्र खोलकर रोगियों की चिकित्सा कीजिये । उन्होंने हमें प्रोत्साहित करते हुए 1984 में अवकाश प्राप्त करने के बाद अपनी सेवाएँ मुफ्त देने की भी पेशकश की । डाक्टर साहब की प्रेरणा से कार्यकत्र्ता इस सुविधा को प्रारम्भ करने पर गम्भीरता से विचार करने लगे। चिकित्सालय चलाने के लिये साधन तथा स्थान पर विचार-विमर्श लगातार चलता रहा। आर्य समाज अर्जुन नगर में स्थान सीमित था। किसी अन्य समाज में इस योजना को कार्यान्वित करने पर भी विचार हुआ । उन्हीं दिनों आर्य समाज एवम् महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के सिद्धान्तों पर अटूट श्रद्धा व विश्वास रखने वाले महाशय निरंजन देव पाहूजा दम्पति परमपिता परमात्मा की अमृतमयी गोद में लीन हो गये । आदरणीय महाशय जी निःसंतान थे । उनके अनुज माननीय म0 रामचन्द्र आर्य (पाहूजा) शिवाजी नगर तथा परिवार के अन्य सदस्य उनकी जायदाद के बारे में विचार कर रहे थे । आर्यवीर नेत्र चिकित्सालय के कार्यकत्र्ताओं ने पाहूजा परिवार के सम्मुख प्रस्ताव रखा कि यदि महाशय निरंजन देव पाहूजा जी का मकान आर्यवीर नेत्र चिकित्सालय को दान कर दिया जाये तो यहां पर उनकी स्मृति में भवन बनाया जायेगा और धर्मार्थ आयुर्वैदिक चिकित्सा पद्धति का अस्पताल चलाया जायेगा । पाहूजा परिवार ने इस प्रस्ताव पर विचार करना प्रारम्भ किया । श्री कन्हैया लाल आर्य एवम् उनके पूज्य पिता
श्री रामचन्द्र आर्य जी ने अपने परिवार से इस प्रस्ताव को स्वीकार कराने के लिये विशेष प्रयास किये । प्रयास सार्थक हुए और बसई रोड पर स्थित उनका मकान परिवार ने दान में आर्यवीर नेत्र चिकित्सालय को दे दिया । स्थान का प्रबन्ध हो जाने पर कार्यकत्र्ताओं का उत्साह बढ़ गया । डा0 ज्योति प्रकाश आर्य जी से सम्पर्क कर औषधालय प्रारम्भ करने की योजना बनाई ।

त्रिमूर्ति समर्पण तथा संकल्प

आर्य धर्मार्थ औषधालय हेतु भवन में आवश्यकता अनुसार सुधार-मरम्मत करायी गई । दानी महानुभावों तथा पाहूजा परिवार ने औषधालय हेतु दिल खोलकर दान दिया । 8 जून 1986 को अत्यन्त उत्साह तथा प्रसन्नता के वातावरण में औषधालय का उद्घाटन् कर दिया गया । अधिकारी तथा अन्तरंग सभासद इसकी सफ़लता के प्रयास में समर्पित हो गये । दैनिक प्रबन्ध व्यवस्था में कार्यकत्र्ताओं की आवश्यकता थी । इस समय डा0 ज्योति प्रकाश आर्य जी ने चिकित्सा, श्री जी आर. मेहन्दीरत्ता, प्रबन्धक तथा श्री ताराचन्द मनचन्दा कोषाध्यक्ष व भंडार अध्यक्ष, अपनी पूरी क्षमता तथा समर्पण से रोगियों की सेवा का भार सम्भाला। डाक्टर ज्योति प्रकाश आर्य की रोगियों के रोग पहचानने की शक्ति, आत्मीयता, मृदुस्वभाव से दूर-दूर से रोगी आकर अपनी चिकित्सा कराने लगे । लगभग 20 वर्ष समर्पित सेवा उपरान्त अचानक म0 ताराचन्द मनचन्दा जी औषधालय भवन में सेवा करते हुए अस्वस्थ हो गये । अतः वे अगस्त 2010 में ईश्वर की अमृतमयी गोद में लीन हो गये। डा0 ज्योति प्रकाश आर्य जी भी 21 वर्ष की सेवा उपरान्त अधिक आयु के कारण अवकाश ले गये । श्री जी.आर. मेहन्दीरता, कुशल प्रबंधक, आज भी औषधालय को सुचारू रूप से नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं । मैं समझता हूँ कि इन तीन महानुभावों की सेवा के कारण ही औषधालय गुड़गाँव में आयुर्वैदिक चिकित्सा केन्द्रों में अपना विशेष स्थान बना सका । वर्तमान में श्री डा0 बी. एस.चैहान आयुर्वेदाचार्य ब्डव्ए ब्ळभ्ै (अवकाश प्राप्त) अपनी सेवाएँ इस औषधालय में दे रहे हैं। डा0 चैहान जी भी अपनी चिकित्सा, योग्यता व मृदुस्वभाव से रोगियों की सेवा कर रहे हैं। चिकित्सा, योग्यता व मृदुस्वभाव से रोगियों की सेवा कर रहे हैं।

फिजि़योथैरेपी केन्द्र:

प्रबन्ध समिति जनता के लाभार्थ विभिन्न सेवा केन्द्र चलाने में प्रयासरत है। दिसम्बर 2009 से फिजि़योथैरेपी केन्द्र का संचालन किया जा रहा है। वृद्ध, बहन, भाईयों की शारीरिक क्षमता बनाये रखने के लिये तथा दुर्घटना उपरान्त पीडि़त अंगों को रोग मुक्त करने में यह पद्धति अत्यन्त उपयोगी है। काफी संख्या में रोगी आकर लाभ उठा रहे हंै। केन्द्र में उपयोगी सभी मशीनें तथा उपकरण मंगा लिये गये हैं। श्री डा0 सचिन अरोड़ा दम्पत्ति इस केन्द्र को सुयोग्यता से चला रहे हंै। सर्व श्री लक्ष्मण पाहूजा अध्यक्ष, जी. आर. मेहन्दीरत्ता प्रबन्धक, राजेश आर्य संयोजक तथा श्री महेन्द्र प्रताप कोषाध्यक्ष इस कार्य को बड़ी श्रद्धा से कर रहे हैं।


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